Highlights:
- अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में मार्को रुबियो का पहला आधिकारिक भारत दौरा।
- भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ नई दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता (Bilateral Talks)।
- मंगलवार को होने वाली क्वाड (Quad) विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले रणनीतिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर।

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (US Secretary of State Marco Rubio) अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर राजधानी नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। पद संभालने के बाद रुबियो का यह पहला भारत दौरा है, जिसे वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई दिल्ली पहुंचते ही उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (S. Jaishankar) के साथ एक सघन द्विपक्षीय बैठक की।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक अड़चनों को दूर करना और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है।
व्यापार, रक्षा और तकनीक पर हुआ बड़ा समझौता
एस जयशंकर और मार्को रुबियो के बीच हुई इस मुलाकात में कई महत्वपूर्ण वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- व्यापारिक संबंधों का रीसेट (Trade Reset): पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच व्यापारिक शुल्कों (Tariffs) को लेकर चल रहे गतिरोध को सुलझाने और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने पर सहमति बनी है।
- रक्षा सहयोग (Defense Cooperation): हिंद महासागर में चीन की बढ़ती दखलअंदाजी को रोकने के लिए दोनों देशों ने सैन्य खुफिया जानकारी साझा करने और आधुनिक रक्षा उपकरणों की कूटनीति को मजबूत करने पर बात की।
- क्वाड समिट की तैयारी: यह बैठक इसलिए भी खास है क्योंकि इसके तुरंत बाद मंगलवार को नई दिल्ली में ही क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक (Quad Foreign Ministers’ Meeting) होने जा रही है, जिसमें जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री भी शामिल होंगे।
“भारत एक अनिवार्य भागीदार” – मार्को रुबियो
बैठक के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि 21वीं सदी की वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भारत अमेरिका का एक “अनिवार्य और सबसे मजबूत रणनीतिक साझेदार” है। वहीं, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए इस बातचीत को बेहद सकारात्मक और दोनों देशों के भविष्य के लिए दूरगामी बताया।

