Highlights:
- संसद के विशेष सत्र में सरकार ने रखा ऐतिहासिक ‘The Delimitation Bill, 2026’।
- 2026 में होने वाले नए परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव।
- उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे अधिक आबादी वाले राज्यों की राजनीतिक ताकत में होगा भारी इजाफा।

नई दिल्ली: भारतीय संसदीय लोकतंत्र और राजनीति के इतिहास में आज का दिन सबसे बड़े टर्निंग पॉइंट के रूप में दर्ज होने जा रहा है। सरकार ने संसद के पटल पर बहुप्रतीक्षित ‘परिसीमन विधेयक 2026’ (The Delimitation Bill, 2026) पेश कर दिया है। इस विधेयक के पास होने के बाद देश के राजनीतिक नक्शे और संसद की संरचना में आमूल-चूल बदलाव देखने को मिलेगा।
विधेयक के मुख्य प्रस्ताव के मुताबिक, लोकसभा की कुल सीटों की संख्या को मौजूदा 550 से सीधे बढ़ाकर 850 कर दिया जाएगा, ताकि देश की बढ़ती आबादी को संसद में सही और आनुपातिक प्रतिनिधित्व (Proportional Representation) मिल सके।
क्यों पड़ी इसकी जरूरत और क्या बदलेगा?
भारत में आखिरी बार सीटों का निर्धारण 1971 की जनगणना के आधार पर हुआ था, जिसके बाद सीटों की संख्या को फ्रीज कर दिया गया था। अब 2026 में इस पाबंदी के खत्म होने के बाद नया परिसीमन लागू किया जा रहा है।
- आबादी के हिसाब से सीटें: नए कानून के तहत राज्यों को लोकसभा सीटें उनकी वर्तमान जनसंख्या के अनुपात में आवंटित की जाएंगी।
- हिंदी पट्टी का बढ़ेगा दबदबा: जनसंख्या के इस नए फॉर्मूले के कारण उत्तर प्रदेश (UP), बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों की लोकसभा सीटों में सबसे बड़ा उछाल आएगा। अकेले उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 120 के पार जा सकती हैं।
विपक्ष ने जताया विरोध, दक्षिण के राज्यों की चिंता बढ़ी
इस बिल के संसद में आते ही सियासी गलियारों में घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस पर आपत्ति जताई है। खासकर दक्षिण भारत के राज्यों (जैसे तमिलनाड, केरल, आंध्र प्रदेश) की क्षेत्रीय पार्टियों का कहना है कि जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण (Population Control) को कड़ाई से लागू किया, उन्हें कम सीटें मिलेंगी और जिन्होंने आबादी नहीं रोकी, उनका राजनीतिक महत्व बढ़ जाएगा।
संसद के इस सत्र में इस ऐतिहासिक बिल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के पूरे आसार हैं।